5 महीने तक गर्भवती महिला को नहीं मिला पोषण आहार, अब मिला ऐसा पैकेट जिस पर उत्पादन तिथि तक नहीं! आखिर वार्ड क्रमांक 11 की आंगनबाड़ी में चल क्या रहा है?
घरघोड़ा :- सरकार एक ओर 'सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0' अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। दावा किया जाता है कि प्रत्येक पात्र हितग्राही को समय पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर रहे और जन्म लेने वाला शिशु स्वस्थ हो। लेकिन नगर पंचायत घरघोड़ा के वार्ड क्रमांक 11 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र से सामने आया मामला इन तमाम दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार वार्ड क्रमांक 11 की एक गर्भवती महिला का आरोप है कि उसे पिछले लगभग 5 महीनों से नियमित रूप से पोषण आहार नहीं दिया गया। कई बार जानकारी लेने और प्रतीक्षा करने के बाद जब आखिरकार पोषण आहार उपलब्ध कराया गया, तब उस पैकेट को देखकर नया विवाद खड़ा हो गया।
मामले में सामने आए पैकेट की तस्वीरों में बैच नंबर और उत्पादन तिथि (Manufacturing Date) लिखने का स्थान तो मौजूद है, लेकिन वह खाली दिखाई दे रहा है। वहीं दूसरी ओर पैकेट पर साफ लिखा गया है कि "उत्पादन तिथि से 100 दिन तक सर्वोत्तम उपयोग"। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उत्पादन तिथि ही अंकित नहीं होगी, तो लाभार्थी कैसे जानेगा कि उसे दिया गया पोषण आहार सुरक्षित है या उसकी उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी है?
यह मामला केवल एक पैकेट का नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। यदि लाभार्थियों को महीनों तक पोषण आहार नहीं मिल रहा और जो मिल रहा है उस पर आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है, तो यह पूरे वितरण तंत्र की पारदर्शिता और निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका लाभ समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। लेकिन यदि लाभार्थियों को कई महीनों तक इंतजार करना पड़े और पैकेट पर आवश्यक विवरण ही स्पष्ट न हों, तो योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है।
अब लोगों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं - आखिर 5 महीने तक गर्भवती महिला को पोषण आहार क्यों नहीं मिला?, क्या संबंधित केंद्र में नियमित वितरण हो रहा है या केवल कागजों में रिकॉर्ड पूरा किया जा रहा है?, पैकेट पर उत्पादन तिथि और बैच नंबर स्पष्ट रूप से क्यों नहीं अंकित हैं?, क्या इस सामग्री की गुणवत्ता और वैधता की जांच की गई थी?, इस पूरे मामले की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
स्थानीय नागरिकों ने महिला एवं बाल विकास विभाग, परियोजना अधिकारी (CDPO) तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि वितरण में लापरवाही या पैकेजिंग में कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं एजेंसी पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार की लापरवाही न हो। अब देखना यह होगा कि विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर सच्चाई सामने लाता है या फिर यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा।








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