जल कुंभी के कब्जे में घरघोड़ा का ऐतिहासिक बगमुड़ा तालाब, अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट
घरघोड़ा। नगर के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक एवं जीवनदायिनी बगमुड़ा तालाब आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। कभी स्वच्छ जल और धार्मिक आस्था का केंद्र रहा यह तालाब आज जल कुंभी के घने साम्राज्य में पूरी तरह समाता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब तालाब में पानी नजर आना भी मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बगमुड़ा तालाब केवल एक जल स्रोत ही नहीं, बल्कि घरघोड़ा की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वर्षों से यहां छठ पूजा, दुर्गा विसर्जन, गणेश विसर्जन सहित विभिन्न देवी-देवताओं के विसर्जन जैसे पवित्र कार्य होते आए हैं। इसके अलावा, नगर के कई लोग यहां स्नान कर अपनी धार्मिक आस्था से जुड़ते रहे हैं।
लेकिन वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। तालाब पूरी तरह जल कुंभी से पट चुका है, जिससे न केवल इसकी सुंदरता खत्म हो गई है, बल्कि जल का अस्तित्व भी संकट में पड़ गया है। जल कुंभी के कारण पानी सड़ रहा है और दुर्गंध फैल रही है, जिससे आसपास के वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूर्व में भी इस समस्या को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं, जिसके बाद केवल औपचारिकता निभाने के लिए सफाई अभियान चलाया गया। कुछ दिन तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा फोटो खिंचवाकर अभियान का दिखावा किया गया, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप आज फिर से वही बदहाल स्थिति सामने आ गई है।
गौरतलब है कि तालाब की यह हालत अब आम नागरिकों के लिए खतरे का कारण भी बनती जा रही है। जल कुंभी के नीचे गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे यहां आने वाले लोगों के लिए दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। खासकर बच्चों और श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी है।
नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि बगमुड़ा तालाब की तत्काल व्यापक सफाई कराई जाए और जल कुंभी को पूरी तरह हटाने के लिए स्थायी योजना बनाई जाए। साथ ही तालाब के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ सकें।
यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब घरघोड़ा का यह ऐतिहासिक तालाब केवल यादों में ही सिमटकर रह जाएगा।



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