“मौत का कारोबार” बना रेत खनन: पहले भी उजागर, हादसों के बाद भी कार्रवाई शून्य
कुरकुट नदी को चीरकर हो रहा दोहन, नाबालिग चला रहे ट्रैक्टर
घरघोड़ा :- कंचनपुर-आमापाली क्षेत्र में अवैध रेत खनन अब सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि खुलेआम “मौत का कारोबार” बन चुका है। कुरकुट नदी का सीना चीरकर दिन-रात रेत निकासी की जा रही है और हैरानी की बात यह है कि यह मामला पहले भी कई बार मीडिया की सुर्खियों में आ चुका है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हादसों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस अवैध खनन और तेज रफ्तार ट्रैक्टरों के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। मासूम लोगों की जान जोखिम में पड़ चुकी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी गहरी नींद में हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर कितनी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है?
नाबालिग चला रहे मौत के ट्रैक्टर
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे अवैध धंधे में नाबालिग लड़कों से बेधड़क ट्रैक्टर चलवाए जा रहे हैं। बिना लाइसेंस, बिना सुरक्षा, ये बच्चे सड़कों पर तेज रफ्तार से ट्रैक्टर दौड़ाते नजर आते हैं। यह सीधे-सीधे कानून की धज्जियां उड़ाने के साथ-साथ मानवता के खिलाफ अपराध है।
मीडिया में खुलासा, फिर भी सिस्टम खामोश
इस पूरे मामले को पहले भी मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाया गया, तस्वीरें और खबरें सामने आईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। नतीजा—माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए और अब यह धंधा और भी तेजी से फल-फूल रहा है।
कुरकुट नदी अस्तित्व के कगार पर
अवैध खनन के चलते कुरकुट नदी का स्वरूप तेजी से बिगड़ रहा है। नदी की गहराई और बहाव पर असर पड़ रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन का खतरा मंडरा रहा है। यह सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है, जिसके साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
क्षेत्रवासियों में अब गुस्सा साफ तौर पर देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन तुरंत बंद कराया जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और नाबालिगों से काम कराने वालों पर सख्त कानून लागू किया जाए।
बड़ा सवाल
जब मीडिया बार-बार सच दिखा चुका है, हादसे हो चुके हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है या फिर कहीं न कहीं सिस्टम की चुप्पी ही इस “रेत माफिया” की ताकत बन चुकी है?
अगर अब भी नहीं जागा प्रशासन, तो अगली खबर शायद किसी बड़ी त्रासदी की होगी…



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