गणतंत्र दिवस पर डॉ. अंबेडकर के संविधान को नमन, उमेश लहरे का समानता और अधिकार का संदेश
उमेश लहरे ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने केवल संविधान नहीं बनाया, बल्कि करोड़ों वंचितों को स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार दिया। भारतीय संविधान देश की आत्मा है, जो हर नागरिक को बिना भेदभाव समान अधिकार देता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संविधान की रक्षा करना ही सच्चा गणतंत्र दिवस मनाना है।
वर्ष 1993 से सतनामी समाज घरघोड़ा इकाई में तन-मन-धन से समर्पित उमेश लहरे समाज को संगठित करने और जागरूकता फैलाने का कार्य निरंतर कर रहे हैं। बीते तीन दशकों से वे यही संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं कि सतनामी समाज शिक्षा, संगठन और अधिकार की लड़ाई में सबसे आगे खड़ा हो। विगत कई दिनों से वे लगातार इस विषय पर चिंतन कर रहे हैं कि समाज को शिखर तक कैसे पहुंचाया जाए।
अपने सामाजिक सफर में उन्होंने ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर समाज की आवाज बुलंद की। वर्तमान में वे भीम आर्मी के नगर अध्यक्ष के रूप में डॉ. अंबेडकर के विचार—शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो—को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
उमेश लहरे ने युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. अंबेडकर के विचारों को केवल नारों तक सीमित न रखें, बल्कि संविधान के रास्ते पर चलकर समाज और राष्ट्र को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि जब तक संविधान सुरक्षित है, तब तक लोकतंत्र और सामाजिक न्याय सुरक्षित है।
गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर उमेश लहरे का संदेश साफ है—
डॉ. अंबेडकर का संविधान ही हमारी ताकत है, यही हमारी पहचान और भविष्य है।







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