घरघोड़ा में जल संकट चरम सीमा पर, नगर पंचायत की लापरवाही से दो दिन से सूखे नल


हड़ताल के चलते जलापूर्ति ठप, आम जनता त्रस्त

घरघोड़ा। नगर में पिछले दो दिनों से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बाधित होने से आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नगर के अधिकांश वार्डों में नलों से एक बूंद पानी नहीं आ रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण जलापूर्ति व्यवस्था ठप पड़ी हुई है।

पानी नहीं मिलने से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। सुबह से लेकर देर रात तक लोग पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। कई परिवार मजबूरी में हैंडपंप, कुएं या निजी स्रोतों से पानी भर रहे हैं, वहीं कुछ लोगों को बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है।

नगरवासियों का कहना है कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है। हड़ताल चाहे जो भी हो, लेकिन आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़े, यह बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। लोगों ने सवाल उठाया है कि नगर पंचायत एवं संबंधित विभाग ने अब तक वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। खासकर छोटे बच्चों और बीमार लोगों के लिए स्वच्छ पानी का अभाव स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकता है।

जनता ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और हड़तालरत कर्मचारियों एवं अधिकारियों से आपसी संवाद कर समस्या का शीघ्र समाधान निकालने की अपील की है। लोगों का कहना है कि पेयजल जैसी आवश्यक सेवा को राजनीति या हड़ताल की भेंट नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितनी तेजी से संज्ञान लेता है और घरघोड़ा की प्यास बुझाने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाते हैं। 

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