डालमिया भारत सीमेंट लिमिटेड द्वारा लांजीबेरना में कृषि भूमि नष्ट किए जाने के विरोध में पत्रकार सम्मेलन
गत 13 दिसंबर की मध्यरात्रि को प्रशासन और पुलिस बल की मदद से डालमिया भारत सीमेंट लिमिटेड जैसी एक निजी कंपनी द्वारा स्थानीय लोगों की सहमति के बिना अवैध रूप से लांजीबेरना की कृषि भूमि पर कब्जा कर फसलों को नष्ट किए जाने की घटना से इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। जिला प्रशासन ने पुलिस बल के सहयोग से जिस तरह ग्राम सभा और भूमि मालिकों की सहमति के बिना चना और मसूर की बोई गई फसलों वाली जमीन को नष्ट किया, उसे कॉरपोरेट आतंकवाद और सरकारी प्रायोजित भूमि लूट के समान बताया गया। यह बात राउरकेला सेक्टर-8 स्थित गांगपुर मजदूर मंच कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में कही गई।
सम्मेलन में कहा गया कि यह घटना व्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर हमला है तथा एक आदिवासी मुख्यमंत्री के शासन में आदिवासियों पर हो रहे हमलों और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट का संकेत देती है। विडंबना और दुख की बात यह है कि देश की राष्ट्रपति आदिवासी हैं, राज्य के मुख्यमंत्री भी आदिवासी हैं और सुंदरगढ़ के सांसद आदिवासी कल्याण मंत्री होने के बावजूद आदिवासियों का जल, जंगल और जमीन, जो उनकी जीवन-जीविका का आधार है, सुरक्षित नहीं है।
आरोप लगाया गया कि आज सरकार और जिला प्रशासन ओसीएल अथवा वर्तमान डालमिया भारत सीमेंट लिमिटेड (OCL/DCBL प्राइवेट) कंपनी के सामने सिर झुकाए बैठे हैं। इससे अधिक निंदनीय और क्या हो सकता है—यह बात जन आंदोलन नेता प्रफुल्ल सामंतराय ने कही। उन्होंने आगे कहा कि राज्य के सत्तारूढ़ दल सहित सभी राजनीतिक दलों को क्षतिग्रस्त भूमि और आंदोलनरत ग्रामीणों से प्रत्यक्ष संवाद कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कानून और संवैधानिक अधिकारों को छीनकर, अमानवीय राज्य हिंसा के जरिए ‘विकास’ के नाम पर ‘विनाश’ क्या स्वीकार्य है या नहीं—यह प्रश्न उन्होंने उठाया।
पत्रकार सम्मेलन में यह भी बताया गया कि फोरम ग्राम सभा समिति के नेतृत्व में लांजीबेरना में चल रहे आदिवासियों के संघर्ष के साथ नेशनल एलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट्स खड़ा है और आगे भी रहेगा।
आज के इस पत्रकार सम्मेलन में जन आंदोलन नेताओं सहित अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे।

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