घरघोड़ा: 50 साल पुराना मकान उजड़ा, भीम आर्मी छत्तीसगढ़ ने लिया मोर्चा — परिवार सड़क पर, प्रशासन मौन
.घरघोड़ा - खसरा नंबर 455/7 पर पचास वर्षों से बने रहे भरत खण्डेल के आशियाने को 23 सितंबर 2025 को राजस्व अधिकारियों द्वारा बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया गया। मकान गिरने के बाद पूरा परिवार — बुजुर्ग, महिलाएँ और छोटे बच्चे — बरसात और तेज़ हवाओं के बीच खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे जीवन यापन करने को मजबूर है। पीड़ित ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), थाना प्रभारी घरघोड़ा को आवेदन दे कर अपनी पीड़ा और आमरण अनशन की सूचना दी, उसके बावजूद प्रशासन ने न राहत दी और न ही न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया।
आवेदन की एक प्रतिलिपि तथा अनशन की सूचना भी संबंधित अधिकारियों को सौंपे जाने के बाद जब प्रशासन चुप्पी साधे रहा, तो मामला अब संगठनात्मक रूप से बड़े स्तर पर जाते हुए दिखाई दे रहा है। भीम आर्मी छत्तीसगढ़ ने इस उत्पीड़न और प्रशासन की बेरुखी को गंभीर बताया है और पूरे प्रकरण को अपना पुख्ता मोर्चा बनाने का ऐलान कर दिया है।
भीम आर्मी छत्तीसगढ़ इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर उठाएगी — यदि स्थानीय प्रशासन ने तुरंत न्याय व राहत नहीं दी तो हम चरणबद्ध आंदोलन, ताला बंदी और आवश्यक कानूनी तथा जनांदोलन करेंगे।”
भरत खण्डेल ने बताया कि वे और उनका परिवार कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं और हमेशा की तरह अब भी उनका संघर्ष न्याय की मांग पर टिका है। वे आगे कहते हैं, “मैंने हर स्तर पर आवेदन किया, अनशन की सूचना दी — पर न तो हमारे पास रहने का ठिकाना है, न कोई मुआवजा मिला और न प्रशासन से कोई मदद।”
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराजगी व्यक्त की है। कई लोगों ने कहा कि आधिकारिक शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना सरकार की जवाबदेही पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। नागरिकों का कहना है कि संवैधानिक अधिकारों और जीवन के बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए अब संगठित संघर्ष ही एकमात्र विकल्प बचा है।
भीम आर्मी छत्तीसगढ़ की ओर से पहले चरण में तत्काल राहत व अस्थायी आवास की मांग की जाएगी; साथ ही राजस्व अभिलेखों और खसरा-पट्टी की निष्पक्ष जांच, प्रभावित परिवार को मुआवजा और जो भी वैधानिक कार्रवाई आवश्यक होगी — वह उठाने की चेतावनी दी जा चुकी है। संगठन ने कहा है कि यदि 10 अक्टूबर तक न्याय व राहत नहीं मिली तो वे घरघोड़ा राजस्व कार्यालय पर ताला बंदी, व्यापक धरना-प्रदर्शन और प्रदेश स्तर पर आंदोलन करेंगे।
इस प्रकरण ने स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और न्यायपालिका की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं —
खासकर तब जब मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन था और फिर भी बुलडोज़र चला कर मकान गिरा दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता व अधिकारवादी संगठनों ने भी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

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