घरघोड़ा में गणेशोत्सव का भव्य समापन : भक्ति, उत्साह और सेवा का अद्भुत संगम...

घरघोड़ा में गणेशोत्सव का भव्य समापन : भक्ति, उत्साह और सेवा का अद्भुत संगम...

घरघोड़ा। जय स्तंभ चौक स्थित श्री श्याम सरकार सेवा संघ गणेश उत्सव सेवा समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय गणेशोत्सव मंगलवार को भक्तिभाव और जनसैलाब के बीच सम्पन्न हुआ। विगत सात दिनों तक गणेश भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नगर में श्रद्धा और उत्साह का अनोखा वातावरण बना रहा।

पूरे नगर में रही श्रद्धा और आस्था की गूंज : प्रत्येक दिन सुबह आरती, पूजा-पाठ, और शाम को भजन-कीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर गणपति बप्पा के दर्शन करते रहे। गणेशोत्सव के दौरान समिति ने समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की, जिससे यह आयोजन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान न होकर सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।

गणेशोत्सव की सफलता में नगर पंचायत उपाध्यक्ष अमित त्रिपाठी की भूमिका केंद्रीय रही। उन्होंने आयोजन के हर चरण में न सिर्फ नेतृत्व किया बल्कि स्वयं सेवाभाव से सक्रिय रहकर समिति और नगरवासियों का दिल जीता। भंडारे से लेकर पूजा-अर्चना तक हर व्यवस्था पर उनकी पैनी नजर रही। स्थानीय लोग मानते हैं कि उनके मार्गदर्शन और ऊर्जा से ही गणेशोत्सव ने घरघोड़ा में ऐतिहासिक स्वरूप लिया।

भव्य भंडारे में उमड़ा जनसैलाब :समापन अवसर पर आयोजित महाभंडारे में नगरवासियों की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। समिति के सदस्यों ने स्वयं सेवाभाव के साथ श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण कर एकता और भाईचारे का संदेश दिया।

समिति के सदस्यों की रही प्रमुख भूमिका :  पूरे आयोजन की सफलता का श्रेय समिति के सदस्यों की सक्रियता और सामूहिक प्रयास को जाता है। इनमें नगर पंचायत उपाध्यक्ष अमित त्रिपाठी, गौतम भोजवानी, रोशन नेताम, करण तायल, आयुष तायल, नरेंद्र बैरागी, भरत गोयल, लखन तायल, सुजीत बोहिदार, संजय सिकदार, अंश तायल, क्रिश गोयल, प्रकाश कनोजिया, दीपक साहू, विनोद एक्का, सागर गुप्ता और अभिजित बिस्वाल का विशेष योगदान उल्लेखनीय रहा।

भक्ति और उत्साह का बना केंद्र : गणेशोत्सव के इस सात दिवसीय आयोजन ने घरघोड़ा में न सिर्फ धार्मिक उत्साह को प्रकट किया, बल्कि समाज को सेवा, भाईचारा और एकता का संदेश भी दिया। नगरवासी इसे घरघोड़ा की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक मानते हैं। 

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