घरघोड़ा अंधेरे में डूबा, बिजली विभाग गहरी नींद में! न सिस्टम सुधरा, न सुनवाई – कब तक झेलेगी जनता ये बिजली की मार?
घरघोड़ा अंधेरे में डूबा, बिजली विभाग गहरी नींद में!
न सिस्टम सुधरा, न सुनवाई – कब तक झेलेगी जनता ये बिजली की मार?
घरघोड़ा -"बिजली जाएगी 3 घंटे के लिए" – ये एक आम मैसेज बन गया है घरघोड़ा के नागरिकों के मोबाइल में। लेकिन हकीकत ये है कि जाती तो है 3 घंटे के लिए, लौटती है 6 घंटे बाद भी नहीं! बिजली विभाग की इस मनमानी और लापरवाही ने लोगों के सब्र की हदें तोड़ दी हैं।
बारिश हो, धूप हो, या सिर्फ बादल ही छा जाएं – बिजली गायब। जैसे घरघोड़ा की लाइनें काँच की बनी हों – हल्की हवा और हल्की बूंद से टूट जाती हैं।
जनता की जुबानी – “अब बस बहुत हो गया”
घरघोड़ा के निवासी अब थक चुके हैं –
छात्रों की पढ़ाई अधर में लटक गई है।
दुकानदार खाली बैठ कर ग्राहक गिन रहे हैं।
गृहिणियाँ परेशान हैं – न मशीन चलती है, न पंखा।
बुजुर्गों और बीमारों की स्थिति और भी दयनीय हो जाती है।
“क्या हर बार बिजली विभाग से निवेदन करना पड़ेगा? क्या ये सुविधा अब भगवान भरोसे है?”
– प्रकाश यादव, स्थानीय नागरिक
*सुधार की बजाय बहाने – सवालों के जवाब नहीं*
जब भी सवाल उठाओ, तो जवाब आता है – लाइन में फॉल्ट है, स्टाफ नहीं है, काम चल रहा है।
लेकिन ये बहाने कब तक? क्या घरघोड़ा रायगढ़ जिले का हिस्सा नहीं है? क्या यहां के नागरिक सेकेंड क्लास के हैं?
विकास की बातें सिर्फ मंचों तक – ज़मीनी हकीकत कड़वी है!
जहां एक ओर सरकारें 24 घंटे बिजली देने की बात करती हैं, वहीं घरघोड़ा में 24 घंटे में 6 घंटे भी बिजली टिक जाए, तो त्योहार लगता है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। आखिर कब तक अधिकारी और नेता आंखें मूंदे बैठेंगे?
*जनता की चेतावनी – सुधार नहीं हुआ, तो सड़कों पर उतरेंगे!*
घरघोड़ा की जनता अब चुप नहीं बैठेगी। अगर समय रहते बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो जमीन पर आंदोलन होगा – जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
*"बिजली हमारी ज़रूरत है, कोई खैरात नहीं। अब हम चुप नहीं रहेंगे!"*
– घरघोड़ा की जनता की एकजुट हुंकार

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