घरघोड़ा में दलित परिवार के आशियाने पर बुलडोज़र चलाने की साजिश!
घरघोड़ा। सदियों से सामाजिक अन्याय झेलते दलित वर्ग पर एक बार फिर अन्याय की गहरी चोट पड़ी है। घरघोड़ा वार्ड क्रमांक 07 निवासी भरत खंडेल का परिवार, जो लगभग पिछले 50 वर्षों से अपने पुश्तैनी घर में निवास कर रहा है, आज अपने ही घर को बचाने के लिए प्रशासनिक उत्पीड़न और साजिशों से जूझ रहा है।
भरत खंडेल ने आरोप लगाया है कि उनके पड़ोसी जगन्नाथ ठाकुर द्वारा लगातार उन्हें डराया, धमकाया और उनके मकान को गिराने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके दिवंगत पिता प्रहलाद खंडेल द्वारा दशकों पहले इस जमीन पर मकान बनवाया गया था, लेकिन पिछले 20 वर्षों से ठाकुर परिवार उन्हें बेघर करने के लिए हरसंभव हथकंडे अपना रहा है।
प्रशासन की मिलीभगत या लापरवाही?
इस गंभीर मामले को लेकर भीम आर्मी भारत एकता मिशन के जिला उपाध्यक्ष संपत कुर्रे ने अनुविभागीय अधिकारी घरघोड़ा को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट चेतावनी दी है – “अब और सहन नहीं होगा!”
ज्ञापन में बताया गया कि 15 दिसंबर 2022 को न्यायालय से त्रुटिवश कब्जा वारंट जारी हुआ और 10 सितंबर 2024 को नगर पंचायत ने मकान खाली करने का नोटिस भेज दिया, जबकि मामला न्यायालय में अभी भी विचाराधीन था। इसके बावजूद 14 जुलाई 2025 को पुलिस बल और राजस्व अमले की मौजूदगी में जेसीबी मशीन लाकर भरत खंडेल के घर को उजाड़ने की कोशिश की गई।
जमीन का सच आया सामने, फिर भी अत्याचार क्यों?
राजस्व विभाग द्वारा किए गए सीमांकन में यह साफ हो गया कि विवादित भूमि खसरा नंबर 455/6 पहले से ही जगन्नाथ ठाकुर के कब्जे में है। ऐसे में प्रश्न उठता है – जब भरत खंडेल उस भूमि पर नहीं हैं, तो फिर उनके घर पर कार्रवाई क्यों?
भीम आर्मी का ऐलान – अब चुप नहीं बैठेंगे!
भीम आर्मी ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को राहत नहीं दी गई, तो संगठन सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगा। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
जातिगत उत्पीड़न का भयावह चेहरा
यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि यह दलित समाज के प्रति जारी जातिगत भेदभाव और प्रशासनिक उदासीनता का एक शर्मनाक उदाहरण है। न्याय की गुहार लगा रहा भरत खंडेल का परिवार आज अपने ही देश में सुरक्षित नहीं महसूस कर रहा।
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन न्याय के साथ खड़ा होता है या साजिशकर्ताओं के साथ।
पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग करते हुए मानवाधिकार आयोग तक जाने का संकेत दिया है।


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