शासकीय महाविद्यालय घरघोड़ा में शोध निर्देशन उन्मुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन
शासकीय महाविद्यालय घरघोड़ा में शोध निर्देशन उन्मुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन
शासकीय महाविद्यालय घरघोड़ा में दिनांक 28 जुलाई 2025 को "शोध निर्देशन उन्मुखीकरण कार्यशाला" का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला महाविद्यालय के शोध के प्रति प्रतिबद्धता तथा नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आयोजित की गई, जिसमें महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोध में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में प्राचार्य डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा में शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए छात्रों को प्रारंभिक स्तर पर ही उचित दिशा-निर्देशन व मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।यह कार्यशाला इसी दिशा में एक सशक्त कदम है।
शोध अकादमिक कार्य ही नहीं, बल्कि यह समाज सृजन का बहुमूल्य माध्यम है । शोध वही श्रेष्ठ जो पठनीय, उपयोगी और नैतिक हो।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रशेखर सिंह, सहायक प्राध्यापक (हिंदी), ने "शोध की अवधारणा, आवश्यकता एवं पद्धति" विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने शोध प्रक्रिया के मूल तत्व, विषय चयन, उद्देश्य निर्धारण, शोध प्रश्नों की संरचना तथा शोध लेखन की शुद्ध शैली पर अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया।
डॉ. श्रुति श्रीवास्तव, सहायक प्राध्यापक (अंग्रेज़ी), ने "शोध में भाषा की भूमिका एवं अकादमिक लेखन" पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार शोध में भाषा की स्पष्टता, सुसंगतता एवं तार्किकता ज्ञान को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत करने में सहायक होती है। उन्होंने प्लेज़रिज्म से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें तथा शोध लेखन में इससे जुड़ी सावधानियों से अवगत कराया।
इसके पश्चात डॉ. रेणु कुजूर, सहायक प्राध्यापक (जूलॉजी), ने विज्ञान एवं जीवविज्ञान विषयों में अनुसंधान पद्धति एवं डेटा विश्लेषण पर सारगर्भित जानकारी दी। उन्होंने डेटा संकलन, ग्राफ, तालिकाओं के उपयोग एवं निष्कर्ष प्रस्तुति की वैज्ञानिक विधियों को विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को शोध प्रस्ताव निर्माण, संदर्भ सूची तैयार करने की विधियाँ तथा शोध में नैतिकता के महत्व पर भी अभ्यासात्मक जानकारी दी गई। कार्यशाला का सफल संचालन डॉ अदिति गौतम सहायक प्राध्यापक द्वारा किया गया।
अंत में प्राचार्य महोदय द्वारा वक्ताओं को स्मृति चिह्न भेंट कर आभार प्रकट किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कार्यशाला ने विद्यार्थियों में शोध के प्रति गंभीरता, रूचि और व्यवहारिक दृष्टिकोण को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला को सफल बनाने में सभी प्राध्यापकगण जिसमें श्री संतोष देवांगन , श्री अजय कुमार, श्री विविषण सिदार, श्री नीलकमल निराला, श्री चंद्रमणि पैंकरा तथा सुश्री भोजकुमारी पटेल ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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