बचपन से ही बच्चों को संस्कारित करने में परिवार की आम भूमिका *" सलिल कृष्ण महाराज"*

 बचपन से ही बच्चों को संस्कारित करने में परिवार की आम भूमिका  *" सलिल  कृष्ण महाराज"*

सरिया ।आरंभ से ही बच्चों को अच्छे संस्कार मिले तो उसमें सद्गुणों का विकास होता है और वह अपनी संस्कृति और परिवार से जुड़ता है ।


 अच्छे संस्कार जीवन को उचित दिशा देते हैं। बच्चों में शिक्षा के साथ ही साथ संस्कारों को होना आवश्यक है। संस्कार के बिना शिक्षा अधूरी है। बच्चों को संस्कारित करना परिवार के बड़े सदस्यों की जिम्मेदारी है। साथ ही समाज के प्रतिष्ठित लोगों का कर्तव्य है। कथावाचक पंडित सलिल कृष्ण गुरु महाराज ने कहा कि आज के इस बदलते परिवेश में बच्चों को संस्कारवान बनाना यज्ञ के समान है । आदर्श समाज की स्थापना संस्कार से ही शुरू हो सकती है। और संस्कार जन्म से ही डाला जा सकता है । सरिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा वाचक पंडित सलिल कृष्ण गुरु महाराज ने यह बात कही ।


 नगर पंचायत परिसर सरिया में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन महाराज ने कहा कि बच्चों के बड़े होने पर संस्कार देना मुश्किल हो जाता है। इसलिए 5 से 15 साल की भीतर ही बच्चों में संस्कार की बीज बोना आवश्यक है। भव्य पंडाल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा की दूसरे दिन बड़ी संख्या में महिला भक्ति व  श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचे। नगर में पहली बार नगर के होनहार कथा वाचक पंडित सलिल कृष्ण गुरु महाराज ने अपनी शिक्षा दीक्षा वृंदावन धाम से पूर्ण की है। और महाराज जी  पहली  कथा  अपने मातृभूमि जन्मभूमि पर होने से   सर्वत्र सराहना की जा रही है। नगर सहित आसपास के लोग श्रद्धा के साथ कथा में शामिल होकर श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कर रहे हैं । कथा का आयोजन 8 से 15 दिसंबर तक संपन्न होंगे ।संगीतमय  श्रीमद् भागवत कथा होने से लोग श्रद्धा व भक्ति के साथ आरती में भी शामिल हो रहे हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल स्वर्णकार ने श्रद्धालुओं से विनम्र अनुरोध करते हुए अपील किया है कि नगर के लाडले कथावाचक पंडित सलिल कृष्ण गुरु महाराज जी के मुखारविंद से कथा  श्रवण कर लाभ प्राप्त करें।

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